Saturday, May 23, 2015
डोगी हूं मैं
मेरा कोई नाम नहीं है। प्यार से मुझे लोग डोगी बुलाते हैं। मेरा नाम डीडब्ल्यूडी(DWD-Dogi With Difference) भी रखा जा चुका है। मेरी कहानी बहुत मजेदार है। मैंने ये ब्लॉग अपनी कहानी सुनाने के लिए बनाया है।
मुझे न सोना बहुत पसंद है। दिन भर सोती हूं लेकिन रात में पहरेदारी करती हूं। मैं पैदायशी पहरेदार नहीं, न यह मेरा काम। कहते हैं न कि हमारी जाति विश्वासपात्र होती है। वो मैं हूं।
जब भी कोई आहट होती है मैं तुरंत चौकन्नी हो जाती हूं।
मैं तो एक सड़क छाप डोगी थी। मुझे मालूम नहीं था कि मैं इस तरह से किसी के घर पहुंच जाऊंगी। यहां मेरी मर्जी चलती है।
है न कमाल कि इंसानों के बीच में इंसानों से ज्यादा प्यार मिलता है।
सोचती हूं कभी-कभी कि किस्मत पलटते देर नहीं लगती।
मेरी मां, भाई-बहन और तमाम रिश्तेदार उसी मोहल्ले में रहते हैं। दिन में कई बार वे मुझसे मिलते हैं। मेरे मालिक मुझे घर से बाहर नहीं जाने देते। लेकिन गेट पर मिलने-जुलने से मना नहीं करते। मैं अपने लंबे मुंह और जीभ की मदद से अपनी बहन को दुलार करती हूं। मेरा भाई दिखने में कमजोर, थोड़ा भद्दा जरुर है, लेकिन वह भी मुझसे बहुत प्यार करता है।
मैं दिनभर चाहरदीवारी में घूमती हूं। मालिक कहते हैं कि मैं किसी खोजबीन में जुटी रहती हूं। दरअसल मैं शिकारी भी हूं।
बाकी कहानी बाद में।
आपकी प्यारी
डोगी.
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